पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के नागरिकों के लिए वीजा और बॉर्डर से जुड़ी पाबंदियां कड़ी कर दी थीं। इसका असर उन पाकिस्तानी महिलाओं पर भी पड़ा, जिनकी भारत में रहने वाले पुरुषों से शादी तय हो चुकी थी।
इन महिलाओं में बड़ी संख्या सिंध प्रांत के हिंदू सिंधी समुदाय से जुड़ी थी। कई महिलाओं की सगाई पहले ही हो चुकी थी और उन्हें शादी के बाद भारत आकर अपने ससुराल में रहना था। लेकिन बदले हुए हालात के कारण उनकी शादी और भारत आने की योजना रुक गई।
काफी प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने कुछ पाकिस्तानी दुल्हनों और उनके रिश्तेदारों को भारत आने की अनुमति दी। इसके बाद कई परिवारों ने पाकिस्तान से भारत पहुंचने के लिए दूसरे देशों के रास्ते का इस्तेमाल किया।
बताया गया है कि अप्रैल से अब तक करीब 150 पाकिस्तानी दुल्हनें अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ भारत पहुंच चुकी हैं। इनमें वे महिलाएं भी शामिल हैं, जिनकी शादी भारत के अलग-अलग शहरों में रहने वाले पुरुषों से तय हुई थी।
पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भारत आने वाले सिंधी परिवारों के लिए वाघा-अटारी बॉर्डर एक प्रमुख रास्ता था। लेकिन पाबंदियों के बाद इस मार्ग से आने वाले लोगों के वीजा आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे थे।
इसके बाद भारत में रहने वाले लोगों और धार्मिक संस्थाओं की मदद से उन महिलाओं की जानकारी जुटाई गई, जिनकी भारत में शादी तय हो चुकी थी। ऐसी करीब 150 दुल्हनों की सूची तैयार कर सरकार के सामने उनकी स्थिति रखी गई।
सरकार की मंजूरी के बाद इन दुल्हनों और उनके परिवारों को हवाई मार्ग से भारत आने की अनुमति दी गई। इसके लिए कई परिवार दुबई, ओमान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अन्य देशों के रास्ते भारत पहुंचे।
नागपुर से जुड़े करीब 15 मामलों में भी ऐसी दुल्हनें भारत पहुंची हैं। परिवारों का कहना है कि लंबे समय से शादी का इंतजार कर रहे लोगों के लिए वीजा मिलने के बाद बड़ी राहत मिली है।
हालांकि, अभी भी करीब 300 पाकिस्तानी महिलाएं ऐसी बताई जा रही हैं, जिनकी भारत में शादी तय हो चुकी है और वे भारत आने के लिए वीजा का इंतजार कर रही हैं। उनके परिवारों की ओर से भी भारत सरकार से अनुमति देने की अपील की गई है।
सिंध का हिंदू सिंधी समुदाय भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बावजूद पारिवारिक और धार्मिक संबंध बनाए हुए है। इसी वजह से दोनों देशों के बीच कई परिवारों के रिश्ते आज भी जुड़े हुए हैं। अब इन लंबित शादियों के लिए बाकी महिलाओं को भी भारत आने की अनुमति मिलने का इंतजार है।

