पंजाब के खालिस्तान विरोधी नेता गुरसिमरन सिंह मंड पर 7 अगस्त 2026 को अंबाला के पंजोखरा साहिब में हुए हमले के बाद उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मंड और उनके परिवार का आरोप है कि Y+ श्रेणी की सुरक्षा होने के बावजूद हमले के दौरान सुरक्षाकर्मी उन्हें और उनके बेटे को प्रभावी तरीके से नहीं बचा सके।
मंड के अनुसार, घटना के समय उनकी सुरक्षा में तैनात सभी जवान मौके पर मौजूद नहीं थे। परिवार का दावा है कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था में पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मी होने चाहिए थे, लेकिन घटना के दौरान करीब 5 जवान ही वहां मौजूद थे। मंड ने आरोप लगाया कि हमले के दौरान कुछ CRPF जवान उन्हें बचाने के बजाय खड़े होकर हंस रहे थे।
मंड ने बताया कि वह 7 अगस्त को पंजोखरा साहिब स्थित गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने पहुंचे थे। उनका दावा है कि उन्होंने सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत पहले ही पुलिस को इसकी सूचना दी थी, लेकिन मौके पर काफी देर तक अतिरिक्त पुलिस बल नहीं पहुंचा। इसी दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों से विवाद बढ़ गया।
मंड के मुताबिक, विवाद बढ़ने के बाद उनकी गाड़ी पर ईंटों, तलवारों और डंडों से हमला किया गया। हमले में गाड़ी का शीशा टूट गया। उन्होंने बताया कि स्थिति बिगड़ने पर उन्होंने वहां से निकलने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में उनकी गाड़ी को रोक दिया गया और कुछ लोगों ने उन्हें वाहन से बाहर खींच लिया।
मंड का आरोप है कि इसके बाद उनके और उनके बेटे के साथ सड़क पर मारपीट की गई। उन्होंने दावा किया कि हमलावरों ने उन्हें और उनके बेटे को घसीटा और धमकाया। इस दौरान उनके बेटे को गंभीर चोटें आईं और उसके सिर में कई टांके लगे। मंड ने भी अपने शरीर पर चोट लगने की बात कही है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मंड ने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस के कुछ जवान हमलावरों से उन्हें छोड़ने की अपील करते रहे, जबकि कुछ CRPF जवान कथित तौर पर उन्हें बचाने के बजाय खड़े रहे। इन आरोपों से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, वीडियो और पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
मंड ने यह भी आरोप लगाया कि हमले के दौरान कुछ लोगों ने उन पर खालिस्तान समर्थक नारे लगाने का दबाव बनाया। उन्होंने दावा किया कि उनसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS के खिलाफ नारे लगाने तथा अमृतपाल सिंह और जरनैल सिंह भिंडरावाले के समर्थन में नारे लगाने को कहा गया। इन आरोपों की भी पुलिस जांच कर रही है।
हमले के बाद मंड और उनके बेटे को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। मंड के मुताबिक, पहले उन्हें अंबाला कैंट अस्पताल ले जाया गया और बाद में उन्हें आगे के इलाज के लिए भेजा गया। सुरक्षा को लेकर चिंता के कारण दोनों का इलाज बाद में घर पर ही चलने की बात भी सामने आई है।
घटना के बाद मंड ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को शिकायत के साथ हमले से संबंधित वीडियो भेजने का दावा किया। इसके बाद सुरक्षा में तैनात 2 CRPF जवानों को मुख्यालय तलब किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, दोनों जवानों के खिलाफ विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
अंबाला पुलिस के मुताबिक, घटना में मंड, उनके बेटे भावजोत सिंह मंड और दो पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। मंड की कार को भी नुकसान पहुंचा है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और हमले के कारणों तथा घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में हुई कथित चूक को लेकर भी सवालों की जांच की जा रही है।

