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कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के फ्रीज किए गए तीन बैंक खातों से सीमित वित्तीय लेनदेन की अनुमति देते हुए महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन खातों से केवल पार्टी के नियमित प्रशासनिक खर्च, कर्मचारियों से जुड़े भुगतान और कानूनी मामलों में आवश्यक व्यय ही किए जा सकेंगे। किसी भी बड़े या असाधारण वित्तीय लेनदेन की अनुमति फिलहाल नहीं होगी।
हाईकोर्ट ने खातों के संचालन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त किया है। उनके सामने अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत किए गए चेकों की जांच होगी और उनकी काउंटर सिग्नेचर के बाद ही संबंधित बैंक भुगतान जारी करेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य सभी वित्तीय गतिविधियों की निष्पक्ष निगरानी सुनिश्चित करना है।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि तीनों बैंक खातों का पूरा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, बैंकिंग डेटा और लेनदेन का विवरण सुरक्षित रखा जाए। अगली सुनवाई के दौरान विशेष अधिकारी अदालत के समक्ष विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि अदालत के निर्देशों का पालन किस प्रकार किया गया।
विशेष अधिकारी के मानदेय को लेकर भी अदालत ने स्पष्ट व्यवस्था की है। उन्हें प्रति माह 1.25 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा और यह राशि इन्हीं बैंक खातों से जारी की जाएगी। उनकी नियुक्ति निर्धारित अवधि तक प्रभावी रहेगी और इस दौरान वे खातों से होने वाले सभी अधिकृत भुगतान की निगरानी करेंगे।
यह मामला तब सामने आया जब जून 2026 में बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पार्टी के तीन बैंक खातों का उपयोग कथित रूप से संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के लिए किया गया है। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस की कार्रवाई के आधार पर संबंधित बैंक ने इन खातों से डेबिट ट्रांजैक्शन पर रोक लगा दी थी।
शिकायत तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट से जुड़े नेताओं की ओर से दर्ज कराई गई थी। इसी शिकायत के आधार पर बैंक खातों को फ्रीज किया गया, जिसके बाद पार्टी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए खातों के संचालन की अनुमति देने की मांग की। पार्टी का कहना था कि बैंक खाते बंद होने से संगठन के नियमित प्रशासनिक और कानूनी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को बताया कि शिकायत राजनीतिक मतभेदों के कारण दर्ज कराई गई है और इसका उद्देश्य पार्टी की सामान्य गतिविधियों को बाधित करना है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि कम से कम आवश्यक खर्चों के लिए बैंक खातों का संचालन बहाल किया जाए।
वहीं पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि शिकायत मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई करना आवश्यक था, ताकि यदि किसी प्रकार का संदिग्ध वित्तीय लेनदेन हो रहा हो तो उसे रोका जा सके। उन्होंने कहा कि जांच अभी जारी है और तथ्यों की पुष्टि के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने संतुलित रुख अपनाते हुए सीमित लेनदेन की अनुमति देने का फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि बैंक खातों से केवल आवश्यक और अनुमत खर्च ही किए जाएंगे तथा प्रत्येक भुगतान विशेष अधिकारी की निगरानी में होगा।
इस पूरे मामले से जुड़े वित्तीय पहलू की जांच अन्य एजेंसियों द्वारा भी जारी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में पार्टी के इन बैंक खातों में जमा लगभग 440 करोड़ रुपये की राशि को भी फ्रीज कर रखा है। जांच एजेंसियां कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों और लेनदेन की जांच कर रही हैं।
अब इस मामले की अगली सुनवाई में हाईकोर्ट विशेष अधिकारी की रिपोर्ट, बैंक खातों के संचालन की स्थिति और जांच से जुड़े नवीनतम घटनाक्रम की समीक्षा करेगा। अदालत के अंतिम निर्देश आने तक बैंक खातों से होने वाला प्रत्येक भुगतान न्यायालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था के तहत ही किया जाएगा।