पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) से जुड़ा विधेयक पेश कर सकती है। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि सरकार बनने के छह महीने के भीतर राज्य में UCC लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। 9 मई को सरकार के गठन के बाद अब इस वादे को पूरा करने की प्रक्रिया शुरू होती दिखाई दे रही है।
प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे जैसे नागरिक मामलों में धर्म आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। सरकार का कहना है कि इससे कानून में समानता और पारदर्शिता बढ़ेगी, जबकि विपक्ष इस मुद्दे पर अपनी अलग राय रखता है।
यदि यह विधेयक विधानसभा में पेश होता है तो उस पर चर्चा के बाद मतदान कराया जाएगा। सदन से पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति और आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह कानून प्रभावी हो सकेगा।
UCC को लेकर प्रमुख बातें
- समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून लागू करना है।
- यह कानून मुख्य रूप से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति से जुड़े मामलों को प्रभावित करेगा।
- धार्मिक पूजा-पद्धति, आस्था और धार्मिक अनुष्ठानों पर इसका सीधा प्रभाव नहीं माना जाता।
- संविधान के प्रावधानों के अनुसार अनुसूचित जनजातियों को विशेष छूट दिए जाने का प्रावधान रखा जा सकता है।
देश में UCC की स्थिति
उत्तराखंड आजादी के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बना। इसके बाद गुजरात और असम की विधानसभाओं ने भी UCC से जुड़े विधेयकों को पारित किया। अब पश्चिम बंगाल इस दिशा में कदम बढ़ाने वाला अगला राज्य बन सकता है।
यदि पश्चिम बंगाल विधानसभा में यह विधेयक पारित होता है, तो राज्य उन राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा जिन्होंने समान नागरिक संहिता लागू करने या उसके लिए विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।