नैनपुर से इंदौर के बीच संचालित पेंचवैली एक्सप्रेस के बी-2 एसी कोच में बुधवार तड़के करीब 4 बजे अचानक आग लगने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। घटना के दौरान कोच में तेजी से धुआं फैलने लगा, जिससे यात्रियों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। उस समय अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे और किसी को भी इस तरह की घटना की उम्मीद नहीं थी। स्थिति को गंभीर देखते हुए तुरंत ट्रेन को रोका गया और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
घटना इटारसी से पहले पोला पत्थर स्टेशन के पास हुई। ट्रेन भोपाल की ओर जा रही थी और बी-2 एसी कोच पूरी तरह भरा हुआ था। धुआं फैलते ही यात्रियों में घबराहट का माहौल बन गया। कई लोगों ने तुरंत आसपास मौजूद यात्रियों को जगाया ताकि सभी सुरक्षित बाहर निकल सकें। समय रहते कार्रवाई होने से किसी भी यात्री को गंभीर नुकसान नहीं पहुंचा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एसी पैनल से पहले धुआं निकलना शुरू हुआ और कुछ ही देर बाद वहां से चिंगारियां भी दिखाई देने लगीं। इसके साथ ही कोच के फायर अलार्म सक्रिय हो गए और बिजली व्यवस्था भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुई। लगातार बढ़ते धुएं के कारण यात्रियों के लिए कोच के अंदर रुकना मुश्किल हो गया और सभी लोग जल्द से जल्द बाहर निकलने का प्रयास करने लगे।
स्थिति बिगड़ती देख ट्रेन की चेन खींचकर उसे तुरंत रोका गया। ट्रेन रुकते ही रेलवे कर्मचारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों ने तेजी से राहत कार्य शुरू किया। कोच में मौजूद करीब 72 यात्रियों, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, को सुरक्षित बाहर निकाला गया। जल्दबाजी के कारण कई यात्री अपना सामान कोच के अंदर ही छोड़कर बाहर निकल आए, क्योंकि उस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता सभी की सुरक्षा थी।
यात्रियों ने बताया कि धुएं के कारण कोच का एक दरवाजा प्रभावित हो गया था, जिसके चलते सभी लोगों को दूसरे दरवाजे से बाहर निकाला गया। सीमित समय और बढ़ते धुएं के बावजूद कर्मचारियों ने व्यवस्थित तरीके से निकासी कराई। इस दौरान यात्रियों में डर का माहौल जरूर था, लेकिन सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे के लगभग 35 अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित कोच की तकनीकी जांच की और आग लगने के कारणों का प्रारंभिक निरीक्षण किया। जांच के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए पूरे कोच की स्थिति का आकलन किया गया ताकि आगे की यात्रा बिना किसी जोखिम के पूरी कराई जा सके।
तकनीकी जांच पूरी होने के बाद बी-2 कोच के सभी यात्रियों को अन्य उपलब्ध कोचों में समायोजित किया गया। इसके बाद ट्रेन को निर्धारित दिशा में आगे रवाना किया गया। यात्रियों को नई सीटों पर बैठाकर उनकी यात्रा जारी रखी गई ताकि किसी को बीच रास्ते में परेशानी का सामना न करना पड़े।


रेलवे प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन यात्रियों को थर्ड एसी के स्थान पर स्लीपर या अन्य श्रेणी में यात्रा करनी पड़ी है, उन्हें किराए का अंतर वापस किया जाएगा। इसके लिए संबंधित यात्रियों को आवश्यक प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके आधार पर यात्रा पूरी होने के बाद तय प्रक्रिया के अनुसार रिफंड प्राप्त किया जा सकेगा।
बी-2 कोच में यात्रा कर रहे कई यात्रियों ने बताया कि फायर अलार्म बजते ही पूरे डिब्बे में दहशत फैल गई थी। धुएं की वजह से सांस लेना कठिन हो रहा था और सभी लोग जल्द से जल्द बाहर निकलना चाहते थे। हालांकि रेलवे कर्मचारियों की तत्परता और समय पर उठाए गए कदमों के कारण बड़ा हादसा टल गया और सभी यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया।
इस घटना ने एक बार फिर रेल यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी के महत्व को सामने ला दिया है। समय पर धुआं दिखाई देना, फायर अलार्म का सक्रिय होना और तत्काल राहत कार्य शुरू होने से संभावित बड़ा नुकसान टल गया। फिलहाल प्रभावित कोच की विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

