हिमाचल में 48 घंटे बेहद भारी बारिश का खतरा: चंबा, मंडी और कांगड़ा में ऑरेंज अलर्ट, 4 अगस्त तक मौसम रहेगा सक्रिय

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हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है और मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार आने वाले 48 घंटे सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जा रहे हैं। इसी को देखते हुए चंबा, मंडी और कांगड़ा जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ जलभराव, पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी खिसकने और अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। प्रशासन ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक आज चंबा, मंडी और कांगड़ा में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा कुल्लू, शिमला, सिरमौर और किन्नौर जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है, जहां मध्यम से भारी बारिश की संभावना है। विभाग ने कहा है कि पर्वतीय इलाकों में मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए स्थानीय लोगों और पर्यटकों को मौसम की जानकारी लगातार लेते रहना चाहिए। विशेष रूप से नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के आसपास सतर्कता बढ़ाने को कहा गया है।

31 जुलाई के लिए भी मौसम विभाग ने चंबा और कांगड़ा जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी रखा है। कुल्लू, मंडी, शिमला, किन्नौर और लाहौल-स्पीति में यलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। लगातार दो दिनों तक संवेदनशील जिलों में अलर्ट बने रहने से यह संकेत मिलता है कि मानसूनी बादल इन क्षेत्रों पर अधिक सक्रिय रह सकते हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि कुछ इलाकों में कम समय में अधिक बारिश दर्ज की जा सकती है, जिससे अचानक बाढ़ या फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति उत्पन्न होने का खतरा बढ़ जाता है।

ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने पहाड़ी सड़कों पर वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा है, क्योंकि तेज बारिश के दौरान भूस्खलन, पत्थर गिरने और सड़क अवरुद्ध होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ग्रामीण और नदी किनारे बसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने को कहा गया है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि चेतावनी का उद्देश्य लोगों को पहले से सचेत करना है ताकि किसी भी आपात स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके।

राज्य में 4 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहने के आसार हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि 1 अगस्त से 4 अगस्त के बीच फिलहाल किसी भी जिले के लिए रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी नहीं किया गया है। इस अवधि में केवल यलो अलर्ट रहने की संभावना है, जिसका अर्थ है कि बारिश जारी रहेगी लेकिन अत्यधिक गंभीर स्थिति की आशंका फिलहाल कम है। इसके बावजूद विभाग ने कहा है कि पहाड़ी राज्यों में स्थानीय परिस्थितियों के कारण मौसम अचानक तीव्र हो सकता है, इसलिए सावधानी बनाए रखना जरूरी है।

पिछले 24 घंटों के दौरान हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई और कई क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहा। इससे दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी देखी गई। लेकिन मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में बादलों की सक्रियता बढ़ने के साथ अधिकतम तापमान में गिरावट आएगी। लगातार बारिश होने पर कई जिलों में दिन का तापमान सामान्य से नीचे जा सकता है, जिससे मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और नम बना रहेगा।

राजधानी शिमला में भी मौसम का असर देखने को मिला है। ढली क्षेत्र में एक पहाड़ी से भूस्खलन की घटना सामने आई, जिसमें एक वाहन को हल्का नुकसान पहुंचा। हालांकि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन यह घटना लगातार बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते जोखिम की ओर संकेत करती है। प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने और लोगों को जोखिम वाले ढलानों से दूर रहने की सलाह दी है।

इस मानसून सीजन में अब तक हिमाचल प्रदेश में सामान्य से लगभग 5 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 28 जुलाई तक राज्य में सामान्य वर्षा 339.7 मिमी मानी जाती है, जबकि इस वर्ष 322.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। यानी कुल मिलाकर राज्य में बारिश सामान्य के करीब रही है, लेकिन विभिन्न जिलों में इसका वितरण काफी असमान रहा है।

कुछ जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। किन्नौर में लगभग 30 प्रतिशत, शिमला में 26 प्रतिशत, बिलासपुर में 1 प्रतिशत, चंबा में 16 प्रतिशत, कुल्लू में 21 प्रतिशत, सोलन में 6 प्रतिशत और ऊना में 11 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य के कई पर्वतीय और मध्य क्षेत्रों में मानसून अपेक्षाकृत मजबूत रहा है। अधिक वर्षा वाले इलाकों में मिट्टी की नमी बढ़ने से भूस्खलन की आशंका भी बढ़ जाती है, इसलिए वहां अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत बताई गई है।

वहीं कुछ जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। हमीरपुर में लगभग 38 प्रतिशत, कांगड़ा में 21 प्रतिशत, लाहौल-स्पीति में 45 प्रतिशत, मंडी में 24 प्रतिशत और सिरमौर में 2 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में सक्रिय मानसून के कारण इन क्षेत्रों में भी वर्षा की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है। फिलहाल राज्यभर में प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट पर ध्यान दें और किसी भी चेतावनी को नजरअंदाज न करें।