अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच सोना और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है। आमतौर पर युद्ध जैसे हालात में निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं, लेकिन इस बार बाजार का रुख उल्टा नजर आ रहा है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को 24 कैरेट सोने की कीमत में बड़ी गिरावट दर्ज हुई और यह 10 ग्राम पर करीब 5,300 रुपए टूटकर 1.46 लाख रुपए के स्तर पर आ गया। एक दिन पहले यह 1.51 लाख रुपए पर ट्रेड कर रहा था।
चांदी की बात करें तो इसमें गिरावट और भी तेज रही है। एक किलो चांदी के दाम में करीब 15 हजार रुपए की कमी आई है और यह 2.25 लाख रुपए तक पहुंच गई है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले कुछ हफ्तों में चांदी ने काफी उतार-चढ़ाव देखा है और अपने उच्चतम स्तर से तेजी से नीचे आई है।
यदि हालिया ट्रेंड पर नजर डालें तो पिछले एक महीने के भीतर सोना करीब 13 हजार रुपए से ज्यादा सस्ता हो चुका है, जबकि चांदी में 40 हजार रुपए से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, जनवरी के अंत में बने अपने ऑल टाइम हाई से तुलना करें तो सोना अब तक करीब 31 हजार रुपए तक नीचे आ चुका है। साल की शुरुआत में जहां इसकी कीमत 1.33 लाख रुपए के आसपास थी, वहीं 29 जनवरी को यह 1.76 लाख रुपए तक पहुंच गया था।
चांदी में गिरावट का दायरा और भी बड़ा है। साल की शुरुआत में यह करीब 2.30 लाख रुपए प्रति किलो थी, जो जनवरी के अंत में 3.86 लाख रुपए तक पहुंच गई थी। लेकिन इसके बाद से लगातार गिरावट का दौर शुरू हुआ और अब यह लगभग 2.25 लाख रुपए पर आ गई है। यानी महज दो महीनों में चांदी करीब 1.61 लाख रुपए तक सस्ती हो चुकी है।
इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण सामने आ रहे हैं। सबसे अहम वजह निवेशकों का बदलता रुझान है। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक जोखिम से बचने के लिए अपने निवेश को कैश में बदल रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल कर सकें। इसके अलावा, जनवरी में जब सोना-चांदी ने रिकॉर्ड स्तर छुआ था, तब बड़े निवेशकों ने भारी मुनाफावसूली की, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ी और कीमतों पर दबाव बना।
अमेरिका की मौद्रिक नीति भी इस गिरावट में अहम भूमिका निभा रही है। फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के संकेतों से भी कीमती धातुओं की मांग प्रभावित हुई है। उच्च ब्याज दरों के माहौल में निवेशक गोल्ड और सिल्वर जैसे एसेट्स से दूरी बनाकर अन्य विकल्पों की ओर बढ़ते हैं।
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल यह गिरावट थमने के आसार कम हैं। आने वाले समय में भी सोना और चांदी दबाव में रह सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचने और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करने की सलाह दी जा रही है।