मध्यप्रदेश में निवेश बुलाने की मुहिम तेज, 21 मार्च को जयपुर में बड़ा इवेंट; CM मोहन यादव उद्योगपतियों से करेंगे सीधा संवाद

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मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। इसी रणनीति के तहत वे अलग-अलग राज्यों में जाकर उद्योगपतियों से सीधे संवाद कर रहे हैं और प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं को सामने रख रहे हैं। भीलवाड़ा में टेक्सटाइल सेक्टर को लेकर हुए सफल संवाद के बाद अब यह पहल जयपुर पहुंच रही है, जहां 21 मार्च 2026 को आईटीसी राजपूताना में “इंटरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश” आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री खुद उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से चर्चा करेंगे और मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों, नई नीतियों और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की जानकारी साझा करेंगे।

जयपुर में होने वाला यह आयोजन कई अहम सेक्टर्स को साथ लेकर चलेगा। कृषि, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी, माइनिंग और पर्यटन जैसे क्षेत्रों से जुड़े उद्योगपति इसमें शामिल होंगे। कार्यक्रम की खास बात यह रहेगी कि मुख्यमंत्री न सिर्फ मंच से संबोधित करेंगे, बल्कि चुनिंदा निवेशकों के साथ वन-टू-वन मीटिंग भी करेंगे। इन बैठकों में प्रोजेक्ट लेवल पर सहयोग, सेक्टर-विशिष्ट संभावनाओं और निवेश को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया पर विस्तार से बातचीत होगी।

दरअसल, मौजूदा समय में जब भारत वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है, तब मध्यप्रदेश भी खुद को इस बदलाव का अहम हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अगुवाई में राज्य सरकार ने औद्योगिक विस्तार और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए एक स्पष्ट रणनीति अपनाई है। सरकार का फोकस सिर्फ निवेश लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके जरिए रोजगार, स्किल डेवलपमेंट और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी है।

राज्य सरकार की नीतियों में भी इस सोच की झलक दिखाई देती है। पिछले साल को ‘औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन वर्ष’ के रूप में मनाने के बाद अब 2026 को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका उद्देश्य कृषि और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल बनाना है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी औद्योगिक विकास से जोड़ा जा सके। इसी दिशा में फूड प्रोसेसिंग, एग्री-बिजनेस और डेयरी सेक्टर पर खास जोर दिया जा रहा है।

मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए कम समय में कई बड़े फैसले भी लिए गए हैं। राज्य में 18 नई औद्योगिक नीतियां लागू की गई हैं और प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए ‘जन विश्वास अधिनियम’ जैसे कदम उठाए गए हैं। इससे निवेशकों के लिए माहौल पहले से ज्यादा पारदर्शी और अनुकूल बना है।

इसके साथ ही प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों में बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स पर काम तेजी से चल रहा है। उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क, नर्मदापुरम में रिन्यूएबल एनर्जी उपकरणों का मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन, ग्वालियर में फुटवियर पार्क, जबलपुर में डिफेंस हब, रतलाम में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क और धार में पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क जैसी परियोजनाएं इस दिशा में बड़े कदम मानी जा रही हैं। वहीं, भोपाल में ग्लोबल स्किल्स पार्क और इंदौर, भोपाल, उज्जैन व रीवा में विकसित हो रहे आईटी पार्क राज्य को तकनीकी और कौशल के क्षेत्र में भी आगे बढ़ा रहे हैं।

सरकार की “रीजनल बैलेंस” नीति के तहत कोशिश यह है कि औद्योगिक विकास सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे प्रदेश में समान रूप से फैले। यही वजह है कि अलग-अलग संभागों में सेक्टर-विशेष इंडस्ट्री को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकें।

जयपुर में होने वाला यह निवेश संवाद इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जहां मध्यप्रदेश खुद को एक ऐसे राज्य के रूप में प्रस्तुत कर रहा है जो न सिर्फ संभावनाओं से भरपूर है, बल्कि उन्हें तेजी से जमीन पर उतारने की क्षमता भी रखता है। सरकार का लक्ष्य साफ है—निवेश आकर्षित करना, उद्योग स्थापित कराना और प्रदेश में रोजगार व समृद्धि के नए रास्ते खोलना।